MLA Poonamchand Vishnoi : पूनमचंद विश्नोई एक प्रेरणादायक जीवन गाथा
आज, 20 फरवरी, 2024 को राजस्थान की राजनीति और समाज सेवा के एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, श्री पूनमचंद जी विश्नोई की जयंती हैं। श्री विश्नोई का जन्म 20 फरवरी, 1924 को जोधपुर जिले के फींच ग्राम में हुआ था। वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
शिक्षा और राजनीतिक जीवन:
श्री विश्नोई ने बी.ए., एल.एल.बी. की उपाधियां प्राप्त की। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के साथ की। वे दूसरी, चौथी, पांचवीं, सातवीं, नौवीं और दसवीं राजस्थान विधान सभा के लिए कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए।
विधानसभा अध्यक्ष के रूप में:
श्री विश्नोई 9 मई, 1967 से 9 जुलाई, 1971 तक राजस्थान विधान सभा के उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद, 7 जुलाई, 1980 से 20 मार्च, 1985 तक उन्होंने विधान सभा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। एक पीठासीन अधिकारी के रूप में, उन्होंने निष्पक्षतापूर्ण कर्तव्य निर्वहन करते हुए सदन की गरिमा को बढ़ाया।
मंत्री के रूप में:
श्री विश्नोई ने वर्ष 1957 से 1962 तक राजस्थान सरकार में उप मंत्री के रूप में कार्य किया। जुलाई, 1971 से 16 मार्च, 1972 तक वे जेल, भाषा, विधि एवं न्याय तथा शिक्षा विभाग के मंत्री रहे।
सामाजिक और सहकारी क्षेत्र में योगदान:
श्री विश्नोई ने अपने सार्वजनिक जीवन में मारवाड़ किसान सभा के मंत्री, सेन्ट्रल को-आपरेटिव बैंक, जोधपुर, राजस्थान सहकारी संघ, राजस्थान को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन और राजस्थान मरु विकास आयोग के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजस्थानी भाषा और संस्कृति के प्रति समर्पण:
राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष के रूप में, श्री विश्नोई ने राजस्थानी भाषा के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए।
खेलों के विकास में योगदान:
राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद् के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए, उन्होंने राज्य में खेलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्हीं के प्रयासों से जयपुर में एस.एम.एस. स्टेडियम का निर्माण संभव हो पाया।
पर्यावरण और कृषि के प्रति रुचि:
श्री विश्नोई वन्य जीवन एवं पर्यावरण संरक्षण तथा कृषि विकास में विशेष रुचि रखते थे। उन्होंने अनेक देशों की यात्राएं की।
निधन:
25 मई, 2006 को श्री पूनमचंद जी विश्नोई का निधन हो गया।
श्री पूनमचंद जी विश्नोई का जीवन एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने अपने राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में हमेशा सिद्धांतों और मूल्यों का पालन किया। उनकी सादगी, सरलता और जनता के प्रति समर्पण उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।